Friday, 13 October 2017

आत्मसम्मान की कविता ( Attitude poem)

बाहर वाले को दिल के अंदर का क्या पता,
हंसने वाले को आँखों के मंजर  का क्या पता, 
मुझसे पूछते हो कि सूरज में कितनी गर्मी है ;
अरे ये जाकर तालाबों से पूछो समंदर को क्या पता| 
                                        

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