Saturday, 20 January 2018

देश प्रेम की कविता

इस देश की मिट्टी कहती है, रक्षा करो मेरे सम्मानों की|
जब बंदूकें छीनी जाती हैं, कश्मीर में वीर जवानों की||

न एपी न बीजेपी ,न एसपी न बिएसपी की
हम बात करेंगे अन्याय सह रहे,धरती के उस बेटे की
वो कश्मीरी भूल गये, ये मेरे ही रखवाले है
जबकि धैर्य रुका था वीरों का,ये हिन्दोस्ताँ ही वाले हैं

वरना अर्थी उठ जाती, कुछ कश्मीरी परवानों की|
जब बंदूकें छीनी जाती हैं, कश्मीर में वीर जवानों की||

जागो जागो अब तो जागो, हे सत्ता के रखवालों
रोक लो तुम इन पापों को ,हे देश के पालनहारों
हाथ न डालोगे जो तुम, इन शैतानो की बर्बादी मे
बह जाओगे तुम भी एकदिन, इस बुरे वक्त की आंधी मे

अब तो इज्जत लुटती दिखती, धरती के अरमानों की|
जब बंदूकें छीनी जाती हैं, कश्मीर में वीर जवानों की||

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