Friday, 9 February 2018

देशभक्ति की कविता

ये मेरे देश की कहानी है
ये सूरों ये वीरों की जुबानी है|

चलते रहते हैं तीर यहां
पूजे जाते हैं वीर यहां
हम दिलवालों के दिलवाले हैं
हम वतनों के रखवाले हैं

ये नई  नहीं ये पुरानी है
ये मेरे देश की कहानी है
सूरों विरों की जुबानी है|

कुछ ख्वाब अधूरे रह गए हैं
ये बात वो हमसे कह गए हैं
भूलो न उनकी जुबानी तुम
भूलो न उनकी क़ुरबानी तुम

जो बात कही है वीरों ने वो बात
हमे निभानी  है
ये मेरे देश की कहानी है
ये सूरों वीरों की जुबानी है|

सम्मान  में भी हम आगे  हैं
और विज्ञान में भी हम आगे हैं
हमने सीखा बस आगे बढ़ना
चलते-चलते कभी न थकना

दुनिया देखती रह जाये हमें  वो पहचान हमें बनानी है
ये मेरे देश की कहानी है
सूरों वीरों की जुबानी है|

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