Thursday, 28 June 2018

मुझे कई राजाओं के कहर दिखाई देते हैं

मुझे कई राजाओं के कहर दिखाई  देते हैं,
बरबादी की होड़ में कई शहर दिखाई देते हैं|

ये तूफान जरा आइस्ता गुजर दरख्तों की शाखाओं से,
मुझे वहां कई परिंदो के घर दिखाई देते हैं|

अरे तुम कोयल की कूक न सुन सके अकेले में भी,
मुझे भरी भीड़ में तितलियों के पर सुनाई देते हैं|

सुना है कि हिज्र-ए-गम मिट जाते हैं कुछ सालों बाद,
लेकिन मुझे आज भी असर दिखाई देते हैं|

कोई उनसे कहो कि हमे अंजाम की फ़िक्र नहीं ,
हमे तो  केवल   सफर   दिखाई   देते  हैं|

मुझे चाहने वाले गरीब हुए तो क्या हुआ,
मुझे तो केवल उनके जिगर दिखाई देते हैं|

लिबाज़ उनका गंदा है मुझे क्या मतलब,
मुझे तो केवल उनके हुनर दिखाई देते हैं|

Friday, 15 June 2018

शरीफों की शराफत से डरता हूँ by Satyendra Kumar


आज उसकी दी हुई अमानत से डरता हूँ |
लगता है उसने कोई और जुर्म सोचा है मेरे लिए,
अब तो उसकी जमानत से डरता हूँ|

उससे कभी बहुत मोहब्बत की थी हमने ,
इसलिए आज उसकी बगावत से डरता हूँ|

मुझे बदमाशों की बदमाशी से खतरा नहीं,
अब तो शरीफों की शराफत से डरता हूँ|

Tuesday, 12 June 2018

Satyendra Kumar

सुना है यहां लोग पुराने सामान बदलते हैं
  कौन रहना चाहता है यहां सारी उम्र
सुना यहां लोग निशदिन

सुना है यहां लोग पुराने सामान बदलते हैं
  कौन रहना चाहता है यहां सारी उम्र
सुना यहां लोग निशदिन मकान बदलते हैं

हमने हर मुसीबत में दिया था साथ जिनका
आज वो मेरे बुरे वक्त के दरम्यान बदलते हैं

हमने जिनको कभी दी थी पहचान अपनी
 आज वही लोग मेरी पहचान बदलते हैं

 ये मौसम मै जनता हूँ कि तू बेकसूर है
  यहां तू नहीं सिर्फ इंसान बदलते हैं      ...

First

Sad shayari