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Hindi All Type Shayari

मेरी कविता

Hindi All Type शायरी मेरी कविता

निश्वार्थ भाव है प्रेम मेरा इसकी कोई भी वजह नहीं मै आज भी तुझ पर मरता हूँ,शायद तुझको ये पता नहीं
सुइयां तकते-तकते हमने रातें सारी जग डाली    मई-जून की घोर दोपरही में राहें सारी तक डाली साइकिल से पैदल चलकर तेरा बलखाना अच्छा था बस मुझसे ही बातें करने पर जग का जलजाना अच्छा था
लेकिन हम दोनों मिल पाते, थी रब की शायद रजा नहीं मै आज भी तुझ पर मरता हूँ,शायद तुझको ये पता नहीं...
दो-चार घड़ी दो चार कदम गर साथ मेरे तू चल पाती तब सूरज की गर्म समायें भी फिर मेरे आगे ढल  जाती तुझमे थी सोंच-समझ लेकिन मेरी चाहत बेबाकी थी तूने अपने दिल की कह डाली पर मेरे दिल की बाकी थी
खुद से ज्यादा चाहा तुझको, की इसके सिवा कोई खता नहीं मै आज भी तुझ पर मरता हूँ,शायद तुझको ये पता नहीं.
देखें कैसे भिड़ती हैं  कमजोर हवाएं  दुनिया की हमने भी तो देखी हैं कुछ जोर वफ़ाएं  दुनिया की इस चेहरे की ख़ामोशी पर एक तेज सी चाहत खिल जाती एक ख्वाब मुकम्मल हो जाता, गर हाँ मे हाँ तेरी मिल जाती
जिस हिज्रे  गम में जीता हूँ इस बढ़कर कोई सजा नहीं मै आज भी तुझ पर मरता हूँ,शायद तुझको ये पता नहीं.

Shayar Satyendra Kumar

Attitude shayari

Shayar satyendra kumar

Satyendra Kumar