Tuesday, 31 July 2018

Shayar Satyendra Kumar

माना  कि किश्मतों के मारे भी बहुत हैं
पलकें उठा के देख सहारे भी बहुत हैं

फिर न मिली दोबारा नजरे  वो तीर सी
वैसे तो इस जहां में नजारे भी बहुत हैं

रुक्सत हुआ जो चाँद तो उजाले न फिर हुए
वैसे तो आसमान में सितारे भी बहुत हैं

बैठे हैं आज जो सब जीते कई वतन
पहले यहां से ये सब हारे भी बहुत हैं

उजड़ा जो वक्त मेरा सारे बदल गये
वैसे तो दोस्त जग में हमारे भी बहुत हैं

Wednesday, 18 July 2018

Attitude shayari

इश्क़ में फ़नाह होने की जुर्रत छोड़ देनी चाहिए,

दिलों पर राज करने की हुकूमत छोड़ देनी चाहिए,

मेरे हमराह, मेरे हमसफ़र,मेरे हमदोस्त ने कहा था कभी

जब बात इज्जत पे हो तब मोहब्बत छोड़ देनी चाहिए..

Wednesday, 11 July 2018

Shayar satyendra kumar

मै बीते हुए हर फ़साने  से बाक़िब हूँ,
तेरी हर अदा और बहाने से बाक़िब हूँ|

तुमने तो अभी पढ़नी सीखी है मोहब्बत ,
मै तो कई जमाने से बाक़िब हूँ|

मत सोच तेरा हुशन मदहोश करदेगा मुझे,
मै शहर के हर मैखाने से बाक़िब हूँ|

इन सबने झूठा नकाब पहना है लैला मजनू का ,
मै इश्क़ के हर दिवाने से बाक़िब हूँ|

इनमे इतना बजूद कहां जो मेरे इरादे बदल सके ,
मै आँधियों के हर परवाने से बाक़िब हूँ|

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Sad shayari