Wednesday, 11 July 2018

Shayar satyendra kumar

मै बीते हुए हर फ़साने  से बाक़िब हूँ,
तेरी हर अदा और बहाने से बाक़िब हूँ|

तुमने तो अभी पढ़नी सीखी है मोहब्बत ,
मै तो कई जमाने से बाक़िब हूँ|

मत सोच तेरा हुशन मदहोश करदेगा मुझे,
मै शहर के हर मैखाने से बाक़िब हूँ|

इन सबने झूठा नकाब पहना है लैला मजनू का ,
मै इश्क़ के हर दिवाने से बाक़िब हूँ|

इनमे इतना बजूद कहां जो मेरे इरादे बदल सके ,
मै आँधियों के हर परवाने से बाक़िब हूँ|

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