Hindi All Type Shayari

Sad Shayari Images

Shayar Satyendra Kumar

माना  कि किश्मतों के मारे भी बहुत हैं
पलकें उठा के देख सहारे भी बहुत हैं

फिर न मिली दोबारा नजरे  वो तीर सी
वैसे तो इस जहां में नजारे भी बहुत हैं

रुक्सत हुआ जो चाँद तो उजाले न फिर हुए
वैसे तो आसमान में सितारे भी बहुत हैं

बैठे हैं आज जो सब जीते कई वतन
पहले यहां से ये सब हारे भी बहुत हैं

उजड़ा जो वक्त मेरा सारे बदल गये
वैसे तो दोस्त जग में हमारे भी बहुत हैं

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