Skip to main content

Shayar Satyendra Kumar

हमारे दिमाग में कई जोर बैठे हैं
जो आये थे मेरे लिए वो कहीं और बैठे हैं
कहां जाऊं और किससे बयां करूं हाले दिल
जितने भी हैं सियासत में सब चोर बैठे हैं

Popular posts from this blog

गरीबी

Shayar Satyendra Kumar

माना  कि किश्मतों के मारे भी बहुत हैं
पलकें उठा के देख सहारे भी बहुत हैं

फिर न मिली दोबारा नजरे  वो तीर सी
वैसे तो इस जहां में नजारे भी बहुत हैं

रुक्सत हुआ जो चाँद तो उजाले न फिर हुए
वैसे तो आसमान में सितारे भी बहुत हैं

बैठे हैं आज जो सब जीते कई वतन
पहले यहां से ये सब हारे भी बहुत हैं

उजड़ा जो वक्त मेरा सारे बदल गये
वैसे तो दोस्त जग में हमारे भी बहुत हैं

देश प्रेम की कविता

इस देश की मिट्टी कहती है, रक्षा करो मेरे सम्मानों की|
जब बंदूकें छीनी जाती हैं, कश्मीर में वीर जवानों की||

न एपी न बीजेपी ,न एसपी न बिएसपी की
हम बात करेंगे अन्याय सह रहे,धरती के उस बेटे की
वो कश्मीरी भूल गये, ये मेरे ही रखवाले है
जबकि धैर्य रुका था वीरों का,ये हिन्दोस्ताँ ही वाले हैं

वरना अर्थी उठ जाती, कुछ कश्मीरी परवानों की|
जब बंदूकें छीनी जाती हैं, कश्मीर में वीर जवानों की||

जागो जागो अब तो जागो, हे सत्ता के रखवालों
रोक लो तुम इन पापों को ,हे देश के पालनहारों
हाथ न डालोगे जो तुम, इन शैतानो की बर्बादी मे
बह जाओगे तुम भी एकदिन, इस बुरे वक्त की आंधी मे

अब तो इज्जत लुटती दिखती, धरती के अरमानों की|
जब बंदूकें छीनी जाती हैं, कश्मीर में वीर जवानों की||