Friday, 10 August 2018

Shayar Satyendra Kumar

हमारे दिमाग में कई जोर बैठे हैं
जो आये थे मेरे लिए वो कहीं और बैठे हैं
कहां जाऊं और किससे बयां करूं हाले दिल
जितने भी हैं सियासत में सब चोर बैठे हैं

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Sad shayari