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लड़के भी रोते हैं, जब घर से दूर होते हैं / हिंदी कविता शायर के द्वारा

￰घर में बच्चे लेकिन बहार  मशहूर होते  हैं
अ जी लड़के भी रोते हैं, जब घर से दूर होते हैं

लड़के भी घर से बाहर मम्मी-पापा के बगैर  होते हैं
अगर लड़की घर की लक्ष्मी, तो लड़के भी कुबेर होते हैं
बस यादे ही रह जाती हैं,अपने गांव जमीनों तक
लड़के भी घर कहां जा पाते हैं,कई साल महीनों तक
अपनों के सपनों लिए ये भी मजबूर होते हैं
अ जी लड़के भी रोते हैं, जब घर से दूर होते हैं

हमेसा सोचते हैं घर के बारे में,पर खड़े कहीं और होते हैं
सिर्फ लड़कियां ही नहीं लड़के भी दिल से बड़े कमज़ोर होते हैं
विश्व जीतने का एक सिकंदर इनमे भी होता है
बस रोते नहीं पर एक समंदर इनमें भी होता है
यदि लड़की पापा की परी तो लड़के भी कोहिनूर होते हैं
अ जी लड़के भी रोते हैं, जब घर से दूर होते हैं


लड़कियों को घर छोड़ जाने का एक डर होता है
लेकिन उनका एक घर के बाद दूसरा घर होता है
माना कि लड़कों को कोई डर नहीं होता
ये नौकरी तो करते हैं कई शहरों में पर उनका कोई घर नहीं होता
चन्द पैसों के खातिर इनके सपने भी चूर होते हैं
अ जी लड़के भी रोते हैं, जब घर से दूर होते हैं

       हिंदी कविता 

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