Ek sainik ke liye kavita

Sainik ke liye kavita by Satyendra Kumar

Shaheed sainik ke liye kavita

इस देश का अभिमान हो तुम
देश की पहचान हो तुम 
सिर्फ तुम फौजी नहीं
इस देश का सम्मान हो तुम

इस तन की ये वर्दी तुम्हारी 
बसंत ऋतु सर्दी  तुम्हारी
तुम हो तो ये देश है
है देश की धरती तुम्हारी

हर दिल के गुणगान हो तुम
शहर की मुस्कान हो तुम
तुमसे हैं झरने किनारे  
हर गांव की मुस्कान हो तुम

तुमसे उम्मीदें हमारी 
होली और ईदें हमारी
 तुम हो तो दिन रात हैं
तुमसे हैं नींदे हमारी

तुमसे हैं सर पांव मेरे 
तुमसे हैं सब दांव मेरे
तुमसे है हर शहर मेरा 
तुमसे हैं सब गांव मेरे

तुम हो तो हवा गैस मेरी
गांव की हर खेत मेरी
तुम हो तो पहाड़ मेरे
तुम हो तो गंगा की रेत मेरी

तुमसे है आंगन हमारा 
माह और फागन हमारा
तुम हो तो सब गीत मेरे 
तुमसे है सावन हमारा

तुमसे ही सुबह शाम है
तुमसे ही सब काम है
तुमसे है रक्षा हमारी  
तुमसे ही आराम है

गंगा का वरदान हो तुम
तिरंगे की पहचान हो तुम
सिर्फ तुमटी फौजी नहीं
इस देश का सम्मान हो तुम




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